क़रार नम्बर १ : मौन व्रत धारण करूँगा। जैसा कि कल की पोस्ट
पर किसी दोस्त के भेस में छुपे दुश्मन ने सलाह तो दी है (कन्या राशि वाले के मौन
व्रत की सलाह देने वाला दुश्मन ही हो सकता है), मगर यह नहीं बताया कि धारण कब करना है।
चलो इतना तो कर ही सकता हूँ कि जब उनसे बात होगी, या फोन आयेगा तब तो कर ही लूँगा। वैसे
इसको थोड़ा सा बदल दूँ, तो ख़्याल बुरा भी नहीं है ~
क़रार नम्बर १ : कम बोलूँगा। कल से बेकार की बक बक किये जा
रहा हूँ। बचपन से सुनता आया हूँ कि बहुत बोलना अहमक़ होने की निशानी है। मगर क्या
करूँ? हर रोज़ एक दो छोटे अहमक़ (छोटे इस लिये कि वह कम बोलते हैं)
मुझ बड़े अहमक़ की बक बक सुनने चले आते हैं। कितना कहता हूँ कि बख़्श दो। मगर नहीं।
बैठे रहते हैं – “ज्ञान” पाने के लिये। वह बोलते कम हैं, और सुनते ज़्यादा हैं; तो टेकनिकली ज्ञानी तो वह हुये। सो क़रार
नम्बर एक – अब मैं ज्ञानी बनूँगा। इस साल बोलूँगा कम, और सुनूंगा ज़्यादा।
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